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एक पूरे जिले को तरक्की और बचत की आदत
किसी एक घर में सबके पास बैंक अकाउंट होना तो, शायद कोई बहुत चौंकाने वाली खबर नहीं होगी। लेकिन, तमिलनाडु का एक पूरा जिला अगले तीन महीने में ऐसा होगा जहां, हर घर में कम से कम एक बैंक अकाउंट तो होगा ही।
तमिलनाडु के सलेम जिले में सात लाख बीस हजार परिवारों में से चार लाख परिवारों में कम से कम एक बैंक अकाउंट तो अभी भी है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया इस जिले को 31 मार्च तक 'total banking district' बना देना चाहता है। यानी इस जिले में कम से कम सात लाख बीस हजार अकाउंट तो होंगे ही।
इस जिले में RBI लोगों को ये भी बता रहा है कि नकली और असली नोट का क्या फर्क होता है। इस जिले में किसी को भी बिना कुछ गिरवी रखे या बिना किसी की सिक्योरिटी के पचास हजार रुपए का कर्झ कभी भी मिल सकता है। यही वजह है कि इस जिले में 13,000 महिलाओं के सेल्फ हेल्प ग्रुप अलग-अलग बैंकों से कर्ज लेकर अपना काम कर रहे हैं।
कमाल ये भी है कि अगर यहां किसी बैंक के खिलाफ कोई शिकायत है तो, ग्राहक सीधे RBI की चेन्नई शाखा में शिकायत कर सकता है। और, RBI भरोसा दिला रहा है कि 45 दिन के भी ऑम्बुड्समैन उनकी शिकायत का निस्तारण कर देगा।
पूरे जिले में हर परिवार के पास कम से कम एक बैंक अकाउंट होने की खबर वैसे तो, सामान्य सी ही खबर लगती है। लेकिन, जब मैं इसके असर पर ध्यान देता हूं तो, ये सीधे-सीधे देश का सबसे बड़ा बचत अभियान नजर आता है।
मैंने इलाहाबाद में पढ़ाई के दौरान (इलाहाबाद विश्वविद्यालय में दाखिला लेने से पहले) अपने एक मित्र की गारंटी पर बैंक अकाउंट खुलवा लिया था। वैसे, खुद मेरे पिताजी बैंक मैनेजर हैं लेकिन, जानबूझकर मैंने उनके बैंक में या उनकी गारंटी पर अकाउंट नहीं खुलवाया कि ये सबसे बचा के पैसे बचाना है। और, आप सोचिए कि मेरे अंदर एक अजीब सी आदत हो गई थी कि महीने में 300 रुपए तो कम से कम मैं चुपचाप उस अकाउंट में डाल ही देता था। अब सोचिए पूरे जिले को बचत की ये आदत लगी तो, देश के लिए और निजी तौर पर उन लोगों के विकास के लिए इससे बेहतर खबर क्या होगी।
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