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Thursday 21 August, 2008
 09:11 | 25/Aug/2007 |  0 Comment(s)
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हमारा इंडिया मेड इन चाइना हो गया है!

नोकिया की BL-5C बैटरी की खराबी ने एक बार फिर चीनी माल की घटिया क्वालिटी के बारे में दुनिया को बता दियानोकिया जैसी बड़ी कंपनी थी, उसे अपनी प्रतिष्ठा की परवाह थी इसलिए 8 करोड़ रुपए से ज्यादा का खर्च झेलकर भी नोकिया ने इस सिरीज की 30 करोड़ बैटरियों में से 4 करोड़ 60 लाख वो बैटरियां वापस ले लींजो, नोकिया को जापानी कंपनी मात्सुशिता ने बनाकर दी थींआपको लगता होगा कि जापानी कंपनियां तो क्वालिटी के मामले में समझौता नहीं करतींफिर ये कैसे हो गयादरअसल ये सारी बैटरियां मात्सुशिता के चीन के प्लांट में लगी हुई थींभारत में इन बैटरियों ने बिना फटे ही खूब हल्ला कियादूसरा एक मामला है अमेरिकी खिलौना कंपनी मटेल टॉयज के जहरीले खिलौनों काइन खिलौनों से बच्चों को तरह-तरह की बीमारियां होने के खतरे की बात सामने आई तो, कंपनी ने अपने कई खिलौने बाजार से वापस ले लिएये कंपनी भले ही अमेरिकी थी लेकिन, ये खिलौने कंपनी के चीन के प्लांट में ही बन रहे थे
चीन के घटिया सामानों के ये उदाहरण भर हैंचीन हमसे तेज रफ्तार से तरक्की कर रहा हैऔर, कई मामलों हमारे देश के नीति-नियंता भी चीन का ही उदाहरण देकर विकास की गाड़ी चीन से भी तेज रफ्तार से दौड़ाना चाहते हैंतेज रफ्तार से विकास करते चीन का यही हल्ला आज भारत के विकास को बट्टा लगा रहा हैअब आप सोच रहे होंगे, इससे भारत के विकास पर कैसे असर पड़ सकता हैदरअसल चीनी सामानों ने कुछ इस तरह से हमारे आसपास घर कर लिया है कि अब तो, मेड इन चाइना के ठप्पे पर नजर भी नहीं जातीचीनी सामानों की घटिया क्वालिटी के बारे में जानने के बाद भी लोग जाने-अनजाने भारत के लोग इसे खरीद रहे हैं और चीन के विकास की रफ्तार और तेज कर रहे हैं
भारत में कंज्यूमर नाम का प्राणी सबसे तेजी से बढ़ा हैयानी वो खर्च करने वाले जिनकी जेब में पैसा है जो, मॉल में शॉपिंग करता है, मल्टीप्लेक्स में फिल्में देखता हैकंज्यूमर नाम का ये प्राणी कंज्यूम करना जानता है, इसे इस बात की ज्यादा परवाह नहीं होती कि खरीदा हुआ सामान कितना चलेगाकंज्यूमर के पास पैसे हैं तो, उस पैसे को खींचने के लिए हर मॉल में माल ही माल भरा पड़ा हैदेश में ऑर्गनाइज्ड रिटेल क्रांति की बात जोर-शोर से सुनाई दे रही हैऔर, ये भी कहा जा रहा है कि यही रिटेल देश में लाखों लोगों को रोजगार के नए मौके देगाभारतीय कंपनियों की तरक्की का भी रास्ता खुलेगालेकिन, कुछ छोटे आंकड़े हैं जिससे साफ होता है कि भारत में हो रही रिटेल क्रांति के फायदे से चीन के विकास की गाड़ी भारत के ही विकास को मात देगी
भारत के जितने भी बड़े ऑर्गनाइज्ड रिटेल स्टोर रहे हैं उसमें जिन सामानों को आप ये समझकर खरीदते हैं कि ये पैसे भारतीय कंपनियों के पास जा रहे हैं वो, पैसे चीन की कंपनियों के पास जाते हैंग्रॉसरी और फर्नीचर आइटम्स का 65 प्रतिशत चीनी कंपनियों का ही माल भरा पड़ा हैफैशन-कॉस्मेटिक्स-बनावटी गहने इसके 75 प्रतिशत पर चीनी कंपनियों का ही कब्जा हैमॉल से खिलौने खरीदने वाले करीब 15 प्रतिशत बच्चे ही देसी खिलौने के साथ अपना बचपन बिता पाते हैं
चीनी सामानों का ये कब्जा सिर्फ भारत के मॉल के माल में ही नहीं हैसड़कों पर होने वाला व्यापार जिसे अनऑर्गनाइज्ड रिटेल कहा जा रहा हैवहां चीन का कब्जा और मजबूत हैसड़क किनारे बिकने वाले अजीब-अजीब से खिलौने, टॉर्च, बैटरी, कॉस्मेटिक्स, कैलकुलेटर, डिजिटल डायरी- सब कुछ चाइनीज हैसामान बेचने वाला चिल्ला-चिल्लाकर पहले ही बता देता है कि सामान मेड इन चाइना है कोई गारंटी नहीं हैफिर भी मोलभाव कर खरीदने वाले की लाइन लगी हैसड़क किनारे लगे इस बाजार में तो, 90 प्रतिशत सामान मेड इन चाइना ही हैऔर, देश के रिटेल बाजार में अनऑर्गनाइज्ड रिटेल का हिस्सा 95 प्रतिशत है
अभी जापानी प्रधानमंत्री शिंजो आबे भारत में हैंभारत-जापान के साथ अरबों डॉलर के व्यापार की बात हो रही हैदोनों देश हर मसले पर एक दूसरे के साथ खड़े हैंलेकिन, जापानी प्रधानमंत्री के भारत आने से पहले अखबारों-टीवी चैनलों पर जो स्टोरीज सामने आईं उससे ये साफ था कि जापान में भारतीय कंपनियों को पकड़ बनाने में पसीने छूटेंगेभारत की तरह जापान के हर मॉल में जापानी में मेड इन चाइना लिखे सामान भरे पड़े हैंमेड इन इंडिया का एक भी ब्रांड अब तक वहां के बाजार में जगह नहीं बना पाया है
चीनी सामान किस तरह से हमारे घरों में जगह बना लेता है और हमें पता ही नहीं चलतामैं चाइनीज सामान जाबूझकर तो, नहीं ही खरीदना चाहतालेकिन, जिस लेनोवो के लैपटॉप पर मैं ये लिख रहा हूं वो, चीन में बना हैमैंने रिलायंस से नेट कनेक्शन लियालेकिन, जब मैं कनेक्शन की डिवाइस लेकर लौटा तो, USB मोडम पर असेंबल्ड इन चाइना की मोहर लगी थी। CAS नोटीफाइड एरिया में रहने की वजह से मुझे सेट टॉप बॉक्स लेना पड़ादेसी कंपनी WWIL का कनेक्शन लियालेकिन, एक दिन रिमोट पर नजर गई तो, वो मेड इन चाइन थासेट टॉप बॉक्स भी वहीं का बना थायानी हमारी तरक्की को दिखाने वाले सारे प्रतीक चिन्हों पर चीन ने कब्जा कर रखा है
चीन की तरक्की की वजह भी साफ पता चल जाती हैदुनिया जिन सामानों को आगे इस्तेमाल करने वाली हो, उसे बनाने में आगे निकलोदुनिया के बाजार को अपने माल से पाट दो, जब तक दुनिया को ये समझ में आएगा कि ये सामान कहां से रहा है तब तक दुनिया उन्हीं सामानों की आदी हो जाएगीये बात भारतीय कंपनियों के लिए समझने की हैभारतीय कंपनियां दुनिया में झंडे गाड़ रही हैंलेकिन, देश की जरूरत के सामान बनाने में पीछे हैंवीडियोकॉन के अलावा दूसरी भारतीय टेलीविजन बनाने वाली कंपनी का नाम भी याद नहीं आताटाटा का वोल्टास का एसी बढ़िया होने के बावजूद मार्केटिंग और समय के साथ बदल पाने की वजह से सैमसंग और एलजी से रफ्तार में पीछे छूट रहा है वैसे, अभी दूसरा सबसे ज्यादा बिकने वाला एसी वोल्टास का ही हैकार-मोटरसाइकिल के मामले में भारतीय कंपनियां अभी आगे हैं लेकिन, विदेशी कंपनियां तेजी से ये हिस्सा कम कर रही हैं
दुनिया भर के लोगों को सॉफ्टवेयर ज्ञान भारतीय दे रहे हैं लेकिन, एक भी ऐसी भारतीय कंपनी लैपटॉप या कंप्यूटर नहीं बना रही है जो, डेल और लेनोवो को थोड़ा भी मुकाबला दे सकेहाल ये है कि कभी-कभी तो, पूरे इंडिया पर ही मेड इन चाइना का ठप्पा सा लगा दिखने लगता हैअच्छा ये है कि अभी पूरा देश इंडिया नहीं बना है, भारत का बड़ा हिस्सा इंडिया बनने से बचा हुआ है, इसीलिए मेड इन चाइना के ठप्पे से अभी देश का बड़ा हिस्सा बचा हैयही बचा हुआ भारत का बड़ा हिस्सा भारतीय कंपनियों के लिए बड़ा बाजार बन सकता है

Category: Business | Permalink