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Thursday 15 May, 2008
 22:39 | 13/Aug/2007 |  0 Comment(s)
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60 साल का जवान देश भारत

 
ये किसी च्यवनप्राश का विज्ञापन नहीं हैये भारत के लोगों के लिए दुनिया में मौके की राह दिखाने वाली लाइन है। 2020 तक दुनिया के सभी विकसित देशों में काम करने वाले लोगों की जबरदस्त कमी होगीयहां तक कि भारत से ज्यादा आबादी वाले देश में भी बूढ़े लोग ज्यादा होंगेदुनिया के इन देशों में आबादी बढ़ने की रफ्तार पर काबू पाया जा चुका हैऔर, अच्छी स्वास्थ्य सुविधाओं की वजह से विकसित देशों में लोग ज्यादा उम्र तक जियेंगेतब दुनिया के विकसित देशों को अपने यहां काम की जरूरतों को पूरा करने के लिए विकासशील कहे जाने वाले देशों की ही तरफ देखना होगाऔर, इसमें भी भारत को सबसे ज्यादा फायदा होगाक्योंकि, यहां पर अभी 60 प्रतिशत लोग 30 साल से कम उम्र के हैंयानी जिन्होंने अभी काम करना कुछ पांच-आठ साल पहले ही शुरू किया हैअगर भारत के 45 साल के लोगों की उम्र तक जोड़ ली जाए तो, ये लोग कुल मिलाकर देश की जनसंख्या के 70 प्रतिशत हो जाते हैं
दरअसल आजादी के साठ सालों में भारत अभी जवान हुआ हैऔर, इसी जवानी के बूते पर दुनिया भर में अपनी ताकत का लोहा मनवाने लायक भी हो गया हैलोकतंत्र और मजबूत हुआ हैलालफीताशाही खत्म हुई हैहर संस्था पर सामाजिक दबाव बढ़ा हैकुछ भी छिपाकर नहीं किया जा सकताविकास सिर्फ राजनीतिक नारा नहीं, राजनीति की जरूरत भी बन गया हैहर कोई विकसित होते भारत में अपना भी हिस्सा देने की जी-तोड़ कोशिश कर रहा हैलेकिन, असली चुनौती अगले करीब दो दशकों की हैजब भारत के पढ़े-लिखे-जानकार लोगों की कद्र दुनिया में और बढ़ेगीपिछले करीब दो दशकों में आईटी और बीपीओ सर्विसेज के बूते दुनिया में झंडा गाड़ने वाले भारत के काबिल युवाओं को हर क्षेत्र में दुनिया बुला रही है। 2020 में भारत में काम करने वाले करीब 5 करोड़ लोग ज्यादा होंगेयानी ये दुनिया की जरूरतों को करीब-करीब पूरा करने के लायक होंगेइनमें से ज्यादातर मौके नॉलेज प्रॉसेस आउटसोर्सिंग के ही होंगेयानी बीपीओ में काम करने वाले सिर्फ अंग्रेजी बोलने वाले और दुनिया के लोगों को सिर्फ कस्टमर सपोर्ट देने वाले नहीं चलेंगेचलेंगे वो, जो काम जानते हैं, जिनका दिमाग अच्छा चलता है, कुछ नया करके दे सकते हैंइसके अलावा ऑटो, मैन्युफैक्चरिंग, फार्मा, रिसर्च, इंजीनियरिंग, मीडिया इन सभी क्षेत्रों में भारत की बढ़त की रफ्तार अगले दो दशकों में सबसे तेज रहने वाली है
दुनिया के विकसित देशों के शहरों के मुकाबले भारत के शहर अभी भी सस्ते हैं और यहां के काम करने वाले लोग भी काफी सस्ते हैंलेकिन, ये लोग उत्पादन क्षमता के मामले में दूसरों को मात देते हैंयही वजह है कि दुनिया की बड़ी कार कंपनियां, बड़ी कंप्यूटर-लैपटॉप बनाने वाली कंपनियां, दुनिया के बड़े रिटेलर, दुनिया की बड़ी फार्मा कंपनियां- सब भारत के दरवाजे पर लाइन लगाए खड़ी हैंहर कोई भारत को अपना हब बनाना चाहता हैडेल और लेनोवो भारत में अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगा रही हैंभारतीयों की जरूरत के लिहाज से लैपटॉप और पर्सनल कंप्यूटर बन रहे हैंकभी सिर्फ आयात होकर आने वाली कारें आपके शहर के बगल में ही बन रही हैंजो, नहीं बन रही हैं उन्होंने
किसी किसी राज्य में यूनिट लगाने की अर्जी दे रखी हैसाफ है सस्ते में अच्छे काम करने वाले भारत से बेहतर शायद ही धरती के किसी कोने में मिल पा रहे हैंबात ये भी है कि ये भारतीय जवान भी धरती के दूसरे कोनों में ज्यादा महंगे हो जाते हैंइसलिए कंपनियां भारत में ही भारतीयों के हुनर का फायदा लेना चाहती हैं
एविएशन और टेलीकॉम ऐसे क्षेत्र हैंजिसमें अब दुनिया की सभी कंपनियों को भारत में ही सबसे ज्यादा मौके दिख रहे हैंभारत में एयरलाइंस के एक दूसरे में विलय से कुछ लोग बेवजह ये अंदाजा लगाने लगे थे कि फिर 90 के दशक की तरह एयरलाइंस की लैंडिंग शुरू हो जाएलेकिन, भारतीय
आसमान में तो रास्ते अब साफ हो रहे हैंभारत में संभावनाएं बढ़ेंगी तो, हवाई सफर करने वाले और बढ़ेंगेवर्जिन ग्रुप भारत के आसमान में उड़ना चाहा है और भारतीयों को वर्जिन मोबाइल पर बात भी कराना चाहता हैवर्जिन ग्रुप के चेयरमैन रिचर्ड ब्रैनसन ने तो यहां तक कहा है कि वो साल भर में ही वर्जिन मोबाइल भारत में शुरू कर देंगेहां, एयरलाइंस आने में थोड़ा समय लग सकता हैदुनिया की बड़ी मोबाइल कंपनी वोडाफोन पहले ही हिंदुस्तान चुकी है
भारत इन सबके लिए तैयार भी हो रहा हैसरकारी नीतियों में भले ही कुछ गड़बड़ियों की वजह से SEZ के अच्छे के बजाए बुरे परिणाम ही मिलते दिख रहे हैंलेकिन, सच्चाई यही है कि देश आगे जा रहा है और इसमें सरकार ज्यादा दखल देने की हालत में नहीं हैसब कुछ इस जवान देश के
कामकाजी जवानों के हाथ में हैसरकार के हाथ में सिर्फ इतना है कि वो कहीं रोड़ा नहीं बने तो, देश के जवानों को थोड़ा कम मेहनत करनी पड़ेगीआजाद भारत के साठ साल पूर होने पर ये बातें इसलिए भी ज्यादा महत्व की हैंक्योंकि, चाइनीज ड्रैगन भी बुढ़ा रहा है। 2020 तक चीन में दुनिया के
सबसे ज्यादा बूढ़े होंगेयानी दुनिया में हमारी विकास की संभावनाओं को चुनौती देने वाला अकेला देश भी तब तक हांफने लगेगाइसलिए जरूरी है कि अगले दो दशकों में हम जवानी की तेज रफ्तार का पूरा फायदा उठा लेंक्योंक, दो दशकों के बाद आज का साठ साल का ये जवान देश साठ साल के बू़ढ़े देश में बदल जाएगा

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